Tuesday, December 18, 2018

मरम्मा मंदिर के प्रसाद में मिला था खतरनाक पदार्थ, मरने वालों की संख्या 14 हुई

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने सोमवार को कहा कि चामराजनगर जिले में एक मंदिर में प्रसाद ग्रहण करने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। जो प्रसाद वितरित किया गया था, उसमें इंसान के लिए खतरनाक पदार्थ के अंश मिले हैं।
जी. परमेश्वर ने कहा कि प्रसाद के नमूने अपराध विज्ञान प्रयोग भेजे गए थे और उनमें ऑर्गेनोफोस्फेट के अंश मिले हैं। यह रसायन इंसान के लिए खतरनाक है। उन्होंने विधानसभा सत्र में कहा कि इस घटना के सिलसिले में 7 लोग हिरासत में लिए गए हैं। कुछ (संदिग्ध) गांव छोड़कर चले गए हैं, जिन्हें ढूढा जा रहा है।
गृह विभाग का भी कामकाज देख रहे परमेश्वर ने कहा- यह किसने किया, इसके पीछे मंशा क्या थी, यह सब भी सामने आ जाएगा। जांच चल रही है। एक या दो दिन में सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने कहा कि मंदिरों में वितरित किया जाने वाला प्रसाद बड़ा पवित्र माना जाता है और सुलवाड़ी गांव में भूमिपूजन कार्यक्रम में किच्छुगुट्टी मरम्मा मंदिर में हुई यह घट
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, ज्यातोरादित्य सिंधिया सहित कई कांग्रेसी नेताओं ने राज्यपाल से मुलकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। कांग्रेस के विधायकों की बैठक आज शाम चार बजे भोपाल में होगी।राजस्थान में कांग्रेस सरकार का मुख्यमंत्री के पद को लेकर गतिविधियां शुरु हो गई हैं। प्रदेश कांग्रेस कायार्लय में विधायकों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें केन्द्रीय पर्यवेक्षक की मौजूदगी में मुख्यमंत्री के बारे में विधायकों की राय जानी जायेगी। विधायकों की राय जानने के बाद उसे पार्टी आलाकमान को अवगत कराया जायेगा।
ना दुखद है। 
प्रसाद के तौर पर तैयार की गई खिचड़ी करीब 150 लोगों में बांटी गई थी और उसे खाने के आधे घंटे बाद ही लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। गृहमंत्री ने कहा- तत्काल ही बीमा लागों को समीप के अस्पताल में ले जया गया। 11 लोगों की मौत हो गई और 125 लोगों का इलाज चल रहा है। अस्पताल में बाद में दो और की जान चली गई। अब मरने वालों की संख्या 14 हो गयी है।

राजस्थान में अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल और मध्यप्रदेश में कमलनाथ ने सोमवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण के बहाने कांग्रेस ने विपक्षी ताकत का प्रदर्शन किया। इन समारोहों में विपक्ष के कई दिग्गज शामिल हुए। लेकिन कांग्रेस सरकार का समर्थन करने वाली सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती नदारद रहीं। वाम दलों से भी कोई बड़े चेहरे ने मंच साझा नहीं किया। 
शपथ ग्रहण में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। उनके अलावा विपक्षी दलों से एनसीपी नेता शरद पवार, जेडीएस नेता व पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी.देवेगौड़ा, टीडीपी अध्यक्ष व आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, राजद नेता तेजस्वी यादव, नेशनल कांफ्रेंस से फारूक अब्दुल्ला और तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी शामिल हुए।  झामुमो नेता हेमंत सोरेन और हिंदुस्तान अवामी मोर्चा के जीतन राम मांझी भी इस मौके पर मौजूद रहे।

Monday, December 3, 2018

15 نائبا في الوطنية يرفضون ترشيح الجربا للدفاع ويستنكرون "انفراد الأقلية" بالترشيحات

أعلن خمسة عشر نائبا في ائتلاف الوطنية، الاحد، رفضهم ترشيح "فيصل الجربا" لحقيبة الدفاع، مستنكرين ماوصفوه بـ"انفراد أقلية داخل القائمة بالترشيحات"، فيما اشاروا الى أن "الجربا" كان "ضابطا طيارا في سرب صدام حسين". 

وقال بيان صحافي مشترك صدر عن نواب في ائتلاف الوطنية، وتلقت السومرية نيوز، نسخة منه، إن "نحو خمسة عشر نائبا من أعضاء القائمة الوطنية أكدوا بشكل صريح عدم التزامهم بترشيح فيصل فنر الجربا الضابط الطيار السابق في السرب الخاص برئيس النظام السابق لحقيبة الدفاع".

وشدد النواب في بيانهم على "ضرورة احترام تعهد القائمة بمنح رئيس الوزراء كامل الحرية باختيار أي من المرشحين الذين قدمتهم القائمة لهذا المنصب".

واشار النواب في البيان، الى أن "بعض نواب القائمة الوطنية يحاولون احتكار القرار السياسي ومصادرة حق أغلبية نواب القائمة فيما يتعلق بترشيح شخصيات كفوءة لتولي حقيبة الدفاع"، معتبرين أن "فيصل فنر مازال أمامه شوط قضائي يتعلق بقضايا لم يتم البت بها حتى الان حول أهليته من الناحية الدستورية لتولي حقيبة الدفاع". 

واشاروا الى ان "الإجراءات الخاصة بالمسائلة والعدالة والقرارات القضائية وإن تم حل بعض منها فلازال هناك شوط أمام الجربا"، لافتين الى أن "إصرار نائبين أو ثلاثة على ترشيحه يثير العديد من الأسئلة حول أسباب هذا الإصرار" .

وذكر نواب الوطنية وفي مقدمتهم النواب فلاح الزيدان ومحمد تميم ومثنى السامرائي وأخرون يزيد عددهم عن ١٥ نائبا، أنهم "يمنحون رئيس الوزراء عادل عبد المهدي كامل الحرية لاختيار شخصيات وطنية مقبولة وكفوءة لوزارة الدفاع والوزارات الاخرى"، مطالبين اياه في ذات الوقت "بعدم الخضوع لرغبات شخصيه لا تمثل رأي القائمه وأن يقدم مصلحة البلاد على مصالحهم الخاصة مهما كانت علاقتهم وثيقة به خصوصا أنهم يستغلون هذه العلاقة بطريقة مؤسفة".

وكانت محكمة التمييز قررت، اليوم الأحد، قبول الطعن الذي قدمه المرشح لوزارة الدفاع فيصل الجربا على قرار شموله بإجراءات هيئة المساءلة والعدالة.أى رئيس الوزراء عادل عبد المهدي، الاحد، أن تجربة القوات الامنية ودحرها لـ"داعش"ابهرت العالم بالمعارك الاستثنائية التي خاضتها وانتصرت فيها، مبينا أن انتهاء خدمة كوكبة منهم بسبب السن القانونية لايعني توقف خدماتهم، ولايعني عدم امكانية استدعائهم مجددا ان اقتضت الحاجة.

وقال المكتب الاعلامي ل‍عبد المهدي في بيان تلقت السومرية نيوز نسخة منه، إن "رئيس مجلس الوزراء القائد العام للقوات المسلحة عادل عبدالمهدي اشاد بالقادة والضباط المحالين على التقاعد بسبب بلوغ السن القانونية بعد دور حافل بالبطولة والشجاعة وبمسيرتهم المهنية التي ستتواصل جيلا بعد جيل دفاعا عن العراق وشعبه، وبالخبرات الميدانية التي تراكمت لديهم".

ونقل البيان عن عبد المهدي قوله، "يشرفنا في هذا اليوم ان نكرم هذه الكوكبة من القادة العسكريين الكبار لقواتنا البطلة التي كسبت قلوب ومحبة العراقيين، وأن تجربة قواتنا الامنية ودحرها لداعش ابهرت العالم بالمعارك الاستثنائية التي خاضتها وانتصرت فيها"، مبينا أن "انتهاء خدمة هذه الكوكبة بسبب السن القانونية لايعني توقف خدماتهم اوالاستفادة من خبراتهم، بل لايعني عدم امكانية استدعائهم مجددا ان اقتضت الحاجة، كما برهنت التجربة السابقة".

واكد عبد المهدي، أن "قواتنا بمختلف صنوفها وتشكيلاتها من جيش وشرطة وحشد شعبي وبيشمرگة وبهمة ضباطها ومقاتليها الشجعان ستواصل تحقيق الانجازات واداء واجبها الوطني بكل قوة واخلاص وتفانٍ".

Wednesday, November 14, 2018

फ़ेक न्यूज़ के ख़िलाफ़ बीबीसी का हल्ला बोल

हालांकि, गोपाल कृष्ण अग्रवाल ये भी कहते हैं कि जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आते हैं, विपक्ष के लोग कुछ भी बोलने और पोस्ट करने लग जाते हैं ताकि सरकार उनका जवाब देती फिरे.
वो कहते हैं, "कभी कोई गौ-रक्षा के नाम पर फ़ेक न्यूज़ फैला देता है तो कभी दलितों के नाम पर."
पर वो ये भी मानते हैं कि फ़ेक न्यूज़ न फैले ये सिर्फ़ सरकार के ही नहीं, सभी के हित में है. लेकिन इसे कंट्रोल कर पाना थोड़ा मुश्किल है.
गोपाल मानते हैं कि सोशल मीडिया संचार का बेहतरीन माध्यम है लेकिन फ़ेक न्यूज़ की वजह से अब इस माध्यम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होने लगे हैं.
भारत में पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है जबकि कुछ ही महीनों में देश की जनता अपनी नई सरकार का चुनाव भी करने जा रही है.
ऐसे में फ़ेक न्यूज़ के और ज़्यादा विस्तार होने की आशंका है. इस पर राजनीतिक दल कैसे इस पर नियंत्रण करने की योजना बना रहे हैं.
कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी कहती हैं, "फ़ेक न्यूज़ के आधार पर दंगे जैसी स्थिति बन जाती है. फ़ेक न्यूज़ के आधार पर दुकानें बंद कर दी जाती हैं. धंधे चौपट कर दिए जाते हैं. ये आने वाले समय में एक बहुत बड़ी चुनौती है. जिस पर पूरे देश और समाज को गंभीर रूप से विचार करना होगा. हम देख रहे हैं बहुत सारे ऐसे अकाउंट आये हैं, वेबसाइट बनी हैं जो ये देखते रहते हैं कि कौन-सी फ़ेक न्यूज़ है. बहुत सारे अख़बार हैं जो फ़ेक न्यूज़ रिपोर्ट करते हैं. फिर भी जिस तरह से ग़लत ख़बरें वायरल होती हैं और ग़लत ख़बरों की वजह से हम जैसे लोगों को धमकियां मिलती हैं उसमें भी अंतर बहुत है. उस अंतर को जल्द से जल्द कम करना बहुत ज़रूरी है."
बीबीसी ने फेक न्यूज़ के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए सोमवार को देश के सात शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए थे. ये सात शहर दिल्ली, लखनऊ, अहमदाबाद, चेन्नई, हैदराबाद, अमृतसर और पुणे हैं.
इन कार्यक्रमों में राजनीति, पत्रकारिता और फ़िल्मी दुनिया से जुड़े कई जाने-माने चेहरों ने हिस्सा लिया. सभी मेहमानों ने फे़क न्यूज़ की समस्या को गंभीर चुनौती मानाआईआईटी दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में फ़िल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने कहा,"आज के ज़माने में हम भारत में ऐसी स्थिति में हैं जहां ऐसा भी हुआ है कि बड़े बड़े न्यूज़ ऑर्गेनाइजेशन हैं, उन्होंने फ़ेक न्यूज़ को डाला है तो फिर क्या कर सकते हैं आप? फिर हम ऐसी स्थिति में है कि किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता.या तो इंसान काम करे, नौकरी करे और पैसे कमाए या इंसान गूगल पर बैठकर फ़ेक न्यूज़ को वैरिफ़ाई करता रहे, फ़ैक्ट चेक करते रहे. दिक्क़त है. जहां तक होता है मैं बचती हूं और जहां ग़लती हो गई मैं माफ़ी मांग लेती हूं."
इसी तरह चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम में अभिनेता प्रकाश राज ने कहा कि इन दिनों फ़ेक न्यूज़ तेज़ी से फैल रही है. वह इतने सधे हुए तरीके़ से फैलाई जाती है कि लोगों के दिमाग़ में ज़रा भी शक नहीं होता.
बीबीसी के महानिदेशक टोनी हॉल ने इस मुहिम की सराहना की है और कहा है कि साल 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान बीबीसी रियलिटी चैक करेगी.
फे़क न्यूज़ से बचने का सबसे कारगर तरीका है जागरुक और सचेत होना. आगे से जब कभी भी आपके मोबाइल में कोई संदेश आए तो उसे जांचना परखना ना भूलें.

Thursday, October 4, 2018

联合国环境规划署敦促在既定目标上进一步减排25%

联合国环境规划署( )最新出版的一份报告指出,各国必须立即加大温室气体减排力度,这样才有机会在本世纪末将全球变暖幅度控制在  内。

报告发布日期选在了
《巴黎气候协定》生效的前一天。文章指出,要想完成既定气候目标,全球温室气体减排量就必须在预计的2030年水平上再削减25%,约合120到140亿吨。

年10月《巴黎气候协定》正式获批后,各国能否履行各自的减排承诺得到了公众的密切关注,并成为11月6日在马拉喀什举行的联合国气候变化框架协议缔约国大会的重要议题之一。

联合国环境规划署
的这份《 年温室气体减排差距报告》对全球各国的减排承诺进行了跟踪记录。该报告作者之一、联合国气候规划署首席科学家杰奎琳·麦克格莱德表示:“目前来看,一切都在朝好的方向发展……但是如果要想使温室气体减排取得预测中较好的结果,就必须保证全球温室气体排放在 年达到峰值。”

研究报告对遏制全球变暖所需的减排量与160多个成员国在2010年递交的《坎昆协议》中承诺的减排量及国家自主贡献预案中的减排量(简称 ,指在《巴黎气候协定》之下各国政府将要采取的减排措施)之间的差距进行了分析。

本次报告与去年最大的区别就在于突出强调了将全球变暖幅度控制在1. ℃内的必要性,因为这将降低碳密集技术导致的“碳锁定”(指技术和制度导致的对碳密集发展路径的系统性依赖)的风险,同时避免全球长期低碳转型过程中的成本上升。

然而科学家认为,虽然落实1.5℃的温控目标将有效缓解当前全球日益严峻的气候变化危机,但并不能从根本上解决问题。今年,全球气温和海平面上升幅度再创新高,各地严重干旱、风暴频发,生命财产和农业生产遭受严重损失,不少人被迫举家迁徙。

报告明确指出,各国必须在 年前加快行动,确保在2030年全球温室气体排放水平能与《巴黎气候协定》的长期目标保持一致。

报告指出:“如今20国集团成员国正共同努力,希望在2020年前落实各自的《坎昆协议》减排目标。但这些目标仍显魄力不足,恐怕不足以为各国完成《巴黎气候协定》减排任务奠定良好的基础。”

不过首席科学家杰奎琳·麦克格莱德(  )的一句话似乎让我们又看到了一丝希望:

“最近,我们发现全球大气二氧化碳含量第一次出现了增长停滞,所以我们有理由相信自己有能力走好这条转型之路。”不过她也表示,完成这一目标的前提是全球温室气体排放必须在最晚2020年达到峰值。
二十国集团减排表现良莠不齐

最受关注的是单位 碳排放最高的几个国家,而数据显示它们同时也是单位GDP减排幅度最大的国家。

报告指出,中国、欧盟和印度有望在不购买抵消额度的情况下实现减排承诺,而巴西和日本则预计会完成大部分减排目标。但是,美国要采取进一步的措施并购买抵消额度才能保证规定的减排进度。相比于其他国家,沙特阿拉伯和俄罗斯在削减人均排放量方面已经被远远地甩在了后面,报告作者甚至将这两个国家称为“真正的隐患”。

中国和印度两国的减排承诺以2005年水平为基准线,以温室气体排放强度削减量为衡量依据。目前,中国已经承诺到2020年碳排放强度相较于2005年下降40%到45%,并有望达到42%。

与此同时,印度也表示在2005年到2010年间削减了12%的排放强度,另有分析统计显示2005年到2012年的减排幅度约为17%(印度承诺在2005-2020年间减排20%到25%)。总之,根据上述数据我们不难看出,到2020年,印度很有可能会减排28%-36%。


如何实现温控目标

报告发现,要想保证全球温度在本世纪上升幅度不超过2℃或1.5℃,那么2030年前全球每年的温室气体排放量就分别不能超过420亿吨和390亿吨二氧化碳当量。

建筑、工业和交通是最需要转型的领域,而能效提升被认为是未来减排的最大来源。2015年,全球节能领域投资共增长6%,达到2210亿,这样的市场趋势恰好证明上述领域的节能减排已经开始。

挪威外交部能源领域政策负责人汉斯·奥拉夫·伊布莱克表示,除非全球能源领域全面改革,否则这个差距会一直存在。他认为:“能源政策才是解决全球气候变化的关键所在。”


中国减排成绩受全球关注

联合国环境规划署负责人艾瑞克·索尔海姆表示:“中国将成为未来10年全球环境变化的主导力量。”他对中国在发展可再生能源(目前中国风能发电量占全球总量的一半)、降低全球太阳能资源的建设成本、授权环保部惩戒重污染企业,以及迅速把握《巴黎气候协定》带来的商机等方面发挥的领导作用给予了高度评价。

索尔海姆说道:“中国正在积极改善城市环境,提高居民生活质量。”他认为,鉴于有人质疑一些中国海外项目可能会给发展中国家带来的污染,中国应当在海外基建项目中执行严格的环境标准。

Tuesday, September 25, 2018

भारत के साथ राफेल डील के वक्त मैं सत्ता में नहीं था : इमैनुअल मैक्रों

न्यूयॉर्क. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र में मंगलवार को राफेल डील को लेकर सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा जब भारत और फ्रांस के बीच 36 विमानों के लिए लाखों डॉलर के सौदे पर हस्ताक्षर हुए थे, तब वे सत्ता में नहीं थे। उन्होंने कहा कि यह सौदा दो सरकारों के बीच हुआ समझौता है।
  1. मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा से अलग एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें उनसे पूछा गया कि क्या भारत सरकार ने कभी फ्रांस या दैसो को बताया था कि उन्हें राफेल डील में रिलायंस को भारतीय साझेदार बनाना होगा? इसी पर मैक्रों ने कहा- तब मैं सत्ता में नहीं था।
  2. इमेनुअल मैक्रों ने कहा कि मैं पूरी तरह स्पष्ट करना चाहूंगा कि यह दोनों सरकारों के बीच की बातचीत है। मैं इसके लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात का हवाला दूंगा, जो उन्होंने कुछ दिन पहले कही थी। मैक्रों पिछले साल मई में राष्ट्रपति बने थे। 
  3. भारत ने सितंबर 2016 में फ्रांस सरकार से 58 हजार करोड़ रुपए में 36 राफेल फाइटर विमानों की डील की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा 2015 के अपने पेरिस दौरे के करीब डेढ़ साल बाद की थी। उम्मीद है कि सितंबर 2019 इन विमानों की डिलीवरी शुरू हो जाएगी।
  4. राफेल डील पर भारत में विवाद उस समय बढ़ा, जब पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद ने फ्रेंच मीडिया को जानकारी दी थी कि राफेल डील में रिलायंस डिफेंस को साझेदार बनाने का प्रस्ताव भारत सरकार ने दिया था। इसके बाद कांग्रेस राफेल डील पर सवाल उठाते हुए कई दिन से भाजपा को घेर रही है।
    चंडीगढ़. पांच राज्य और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ पेट्रोल-डीजल के रेट बराबर रखने पर सहमत हो गए। इनमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश और चंडीगढ़ शामिल हैं। इन राज्यों के वित्त मंत्रियों और अफसरों की मंगलवार को मीटिंग हुई। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि पेट्रोल-डीजल पर वैट की दर बराबर हो। आखिरी फैसला अक्टूबर में
    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंडीगढ़ समेत छह राज्य 3% से 4% तक वैट घटा सकते हैं। इससे पेट्रोल, डीजल दो रुपए तक सस्ता होगा। इन राज्यों में पंजाब में पेट्रोल पर सबसे ज्यादा 35.12% वैट लगता है।
    दिल्ली में होने वाली बैठक में लिया जाएगा।
    1. ट्रोल-डीजल के रेट पिछले कई दिनों से रिकॉर्ड उच्च स्तर पर हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों से टैक्स घटाने की अपील की। जो राज्य एक समान रेट रखने पर सहमत हुए हैं उनमें से तीन (हरियाणा, हिमाचल, उत्तरप्रदेश) में भाजपा की सरकार है।
    2. अभी तक चार राज्यों ने पेट्रोल-डीजल के रेट कम किए हैं। राजस्थान सरकार ने वैट 4% कम किया। आंध्रप्रदेश और कर्नाटक ने 2-2 रुपए घटाए। पश्चिम बंगाल में एक रुपया कम किया गया।
    3. चंडीगढ़ में मंगलवार को हुई राज्यों की बैठक में दूसरे मुद्दों पर भी सहमति बनी। आबकारी नीति, ट्रांसपोर्ट परमिट और गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी एक जैसी की जाएगी। राज्यों की एक कमेटी का गठन कर दिया गया है, जो दो हफ्ते में रिपोर्ट देगी।
    4. बैठक में हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के अलावा उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।